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  • शिवलिंग कभी खंडित नहीं होता: भगवान शिव के दो रूप हैं—साकार (सकल) और निराकार (निष्कल यानी शिवलिंग)। अग्नि पुराण (पृष्ठ 224) और स्कंद पुराण के अनुसार, देवताओं, मुनियों या तत्ववेत्ताओं द्वारा स्थापित शिवलिंग यदि पुराना, जीर्ण या क्षतिग्रस्त भी हो जाए, तो भी वह खंडित नहीं माना जाता[1]। इसी प्रकार हनुमान जी की मूर्ति भी खंडित नहीं मानी जाती[1]।
  • विसर्जित करने या हटाने के दुष्परिणाम: यदि माता-पिता का कोई अंग चोटिल हो जाए तो हम उन्हें त्यागते नहीं हैं; ठीक उसी तरह शिवलिंग को खंडित मानकर जल में फेंकना या विस्थापित करना शास्त्रों के अनुसार महाविनाश और जनहानि का कारण बनता है[1][2]।
  • संरक्षण एवं जीर्णोद्धार का सही तरीका: किसी प्राचीन या क्षतिग्रस्त शिवलिंग को फेंकने या हटाने के बजाय उसी स्थान पर पीतल, तांबे या किसी अन्य धातु का आवरण (कवच) चढ़ाकर पुनः सुव्यवस्थित कर देना चाहिए[2]।
  • असीम पुण्य एवं ऋषि-आशीर्वाद: सौ नए मंदिरों के निर्माण से जितना पुण्य संचित होता है, उतना किसी एक प्राचीन मंदिर या शिवलिंग का जीर्णोद्धार करने से प्राप्त हो जाता है[3]। मंदिर के गर्भगृह में फर्श लगवाने या रंग-रोगन करवाने से जीवन में अनंत सुख की प्राप्ति होती है और उन प्राचीन ऋषियों-देवताओं का असीम आशीर्वाद मिलता है जिन्होंने इन्हें स्थापित किया था[3]।

 

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